Thanks to Matrichaya Sewabharti 5 Orphan boys will rewrite their destiny

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5 अनाथ बच्चे अब मातृ छाया सेवाभारती विदेशो में अपना भविष्य बनायेंगे

अंजुल मिश्रा, जबलपुर।  कहते  है किस्मत पलटते देर नही लगती  | जी हाँ  यह सच भी साबित हुआ | अचानक किस्मत पलटी और उनके सपनो को पंख लग गये| जबलपुर के मात्री छाया सेवाभारती के पांच बच्चो की परवरिश विदेशो में होगी |  अब न केवल विदेशों में उनका इलाज होगा बल्कि बेहतर भविष्य भी बन सकेगा। यह पहला मौका है जब जबलपुर के मातृ छाया सेवाभारती आश्रम के 5 बच्चों की परवरिश विदेशों में होगी। तीन  बच्चे अमेरिका में गोद जाएंगे वहीं 1-1 बच्चा फ्रांस और इटली में। सेंट्रल एडाप्शन रिसोर्स एजेंसी (कारा) ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस साल के अंत तक पांचों मासूम बच्चों को विदेशी माता-पिता मिल जाएंगे। अब तक यह संस्था करीब 2 सौ अनाथ बच्चों को गोद दे चुकी है लेकिन वे सभी देश के भीतर ही हैं।

कैसे हुआ संभव

पहले अनाथ बच्चों को विदेश में गोद देने का नियम नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सेंट्रल एडाप्शन रिसोर्स एजेंसी (कारा) ने अगस्त 2015 में नए नियम तैयार किए जिसके आधार पर अब विदेशी भी देश के बच्चों को गोद ले सकते हैं।

यह है प्रक्रिया

-अनाथ बच्चा मिलते ही आश्रम सेंट्रल एडाप्शन रिसोर्स एजेंसी (कारा), सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड वेलफेयर कमेटी) व पुलिस को सूचना देती है

-कागजी कार्रवाई के बाद सीडब्ल्यूसी इन बच्चों को एडाप्शन के लिए फ्री घोषित करती है।

-कारा द्वारा बच्चों की जानकारी ऑनलाइन की जाती है।

-देश में कोई भी व्यक्ति इन बच्चों को गोद लेने का इच्छुक नहीं होता है तो कारा इन बच्चों की जानकारी विदेशों में गोद लेने के लिए अपलोड करती है।

-ऑनलाइन डाक्यूमेंट की पूर्ति होने के बाद कारा 6 बच्चों को ऑनलाइन दिखाती है जिनमें से उन्हें चयन करना होता है।

-बच्चों के चयन के बाद दोनों देशों की एंबेसी एग्रीमेंट की कार्रवाई करती है और आश्रम को पॉवर ऑफ अटार्नी दी जाती है जिसके आधार पर फेमिली कोर्ट में केस लगाया जाता है

-कोर्ट के आदेश के बाद एंबेसी को सूचित किया जाता है और गोद देने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

कैसे होगी देखभाल

-विदेशों में बच्चों को गोद देने के बाद उनकी पूरी जिम्मेदारी एंबेसी की होती है

-एंबेसी हर 6 माह में एक सोशल वर्कर को बच्चे की रिपोर्ट लेने भेजती है।

– यह रिपोर्ट फोटो के साथ अपलोड की जाती है।

– यदि तीन साल तक बच्चे की परवरिश की रिपोर्ट सही मिलती है तो फिर एडाप्शन सही माना जाता है

विदेशों में अडाप्शन क्यों

जिन पांच बच्चों को विदेश में गोद लिया जा रहा है, वे किसी न किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं। अनाथाश्रम संचालक प्रमुख अतीत तिवारी का कहना है इन बीमारियों का इलाज विदेश में ही संभव है। संभवत: इसी कारण से उन्हें वहां के लोग गोद ले रहे हैं। फ्रांस में गोद लेने वाली तो एक एनआरआई महिला ही हैं जो अकेली हैं।

– Source: Naidunia


Source http://aamaadmee.com/2016/08/10/5-अनाथ-बच्चे-अब-विदेशो-में-अ/

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