Sewabharati Delhi Women day special on Empowerment

नवरात्रि स्‍पेशल : महिलाओं को इस तरह स्वावलंबी बना रही हैं शकुंतला
राजधानी में हर कोई भागदौड़ की जिंदगी जी रहा है। यहां परिवार के लिए लोगों के पास समय निकालना मुश्किल
हो रहा है, लेकिन कुछ ऐसे भी लोग हैं जो घर-परिवार के साथ समाज की चिंता भी करते हैं। वे समाज में पिछड़ चुके लोगों को आगे बढ़ाने में सक्रिय रहते हैं। ऐसे ही लोगों में एक नाम है शकुंतला उपाध्याय का। कुशल गृहिणी शकुंतला ने नारी शक्ति को स्वावलंबी बनाने का बीड़ा उठा रखा है। कई साल से वह गरीब परिवारों की युवतियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं। समाज सेवा से लगाव के कारण ही छह साल पहले वह संघ की अनुषांगिक इकाई सेवा भारती से जुड़ गईं। सेवा भारती के बैनर तले शकुंतला फिलहाल 32 बस्तियों में रोजगार प्रशिक्षण के लिए कार्यक्रम चला रही हैं।
शकुंतला बताती हैं कि मंडोली रोड स्थित सेवा धाम और गोपाल धाम को देखने के बाद उन्हें समाज के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा मिली। सेवा धाम में जहां गरीब परिवारों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है, वहीं गोपाल धाम में आतंकी हमलों में मारे गए लोगों के बच्चों की परवरिश होती है। इससे प्रेरित होकर वह सेवा भारती से जुड़ गईं। इसके बाद विभिन्न बस्तियों में सेवा भारती के कार्यों का विस्तार देना शुरू कर दिया। वे बताती हैं कि युवतियों को पढ़ाई लिखाई के साथ ही रोजगार के लिए उन्हें हुनरमंद बनाना जरूरी है। इसी वजह से उन्हें सिलाई, मेहंदी कढ़ाई, कंप्यूटर के साथ श्रृंगार का प्रशिक्षण दिया जाता है। अब तक 15 हजार लोगों को इसका लाभ मिला चुका है।
सेवा भारती सिर्फ युवतियों को प्रशिक्षित नहीं करता, बल्कि कई जगहों पर किशोरों और युवकों के लिए प्रशिक्षण अभियान चलाया जा रहा है। कहीं पर भी बच्चे भीख मांगते हुए नजर आते हैं तो उनके पढ़ने की व्यवस्था की जाती है। साथ ही उन्हें अगरबत्ती, मोमबत्ती व बैग बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इनमें कई बच्चे अब अपने पैरों पर खड़े हो चुके हैं। शकरपुर में रहने वाली 45 वर्षीय शकुंतला बताती हैं कि प्रशिक्षण देने के बाद कई लोग खुद रोजगार तलाश कर लेते हैं। जो लोग रह जाते हैं, उनके लिए सेवा भारती की तरफ से व्यवस्था की जाती है। इन बस्तियों में स्वास्थ्य जांच शिविर व सामूहिक विवाह आदि का भी आयोजन किया जाता है।
स्वदेश कुमार, पूर्वी दिल्‍ली

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